Veer Abdul Hamids wife receives a grand welcome 16069771

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सेना ने वीर अब्दुल हमीद की पत्नी को पलकों पर बिठाया

परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी बीबी रसलून अमृतसर पहुंची तो सेना ने उनका भव्य स्वागत किया। भावुक होकर रसूलन ने कहा कि भारतीय सेना ही हमारा परिवार है।

अमृतसर [रविंदर शर्मा]। पाकिस्तानी सेना को नाको चने चबवाने वाले 1965 की जंग के हीरो वीर अब्दुल हमीद पत्नी बीबी रसूलन गांव आसल उताड़ में भारतीय फौज द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समागम में पहुंची। पहली बार शहीद की पत्नी बीबा रसूलन अपने पौत्र व परिवारिक सदस्यों के साथ यहां पहुंची और पति की यादगार पर चादर चढ़ाई।

इससे पूर्व गत दिवस अमृतसर स्टेशन पर  भारतीय सैनिकों के उनका भव्य स्वागत किया। भावुक बीबी रसूलन ने कहा कि भारतीय सेना ही उनका परिवार है और यहां वह अपने परिवार के बीच आई हैं। पंजाब मेल से गत दिवस सुबह 10.36 पर प्लेटफार्म पर पहुंचते ही भारतीय सैनिकों ने बीबी रसलून को सम्मान सहित गाड़ी से उतारा और व्हील चेयर पर बिठा लिया। 15 इंफेंट्री के सूबेदार इकबाल सिंह, एएमसी के कैप्टन डॉ. जी शिवराम व रिटायर्ड सूबेदार प्रकाश चंद ने उनका स्वागत किया।

अमृतसर में बीबा रसूलन का भव्य स्वागत किया।

शहीद के पोते जमील खान ने बताया कि जब दादी मां ने अपनी अंतिम इच्छा दादा वीर अब्दुल हमीद की खेमकरण सेक्टर के गांव आंसल उताड़ में स्थित मजार पर चादर चढ़ाने की व्यक्त की तो उन्होंने भारतीय सेना के जरनल विपिन रावत से बात की, जिन्होंने इसकी तुरंत व्यवस्था करवा दी। उनके दादा वीर अब्दुल हमीद को को 1962 की चीन के जंग में सेना मेडल मिला तो 1965 की पाकिस्तान की जंग में परमवीर चक्र।

उनके दादा की बहादुरी के किस्से आज भी सेना के अधिकारी सुनाते हुए कहते हैं कि देश में अभी तक इससे बड़ा (परमवीर चक्र) कोई अवार्ड नहीं है और होता तो उनके दादा को वही मिलता, इसलिए भारतीय सेना ने उनके दादा के नाम के साथ वीर शब्द का प्रयोग करते हुए उनके दादा को शहीद वीर अब्दुल हमीद का दर्जा दिया।

शहीद वीर अब्दुल हमीद की मजार चादर चढ़ाती शहीद की पत्नी।

अटारी पर देखी रिट्रीट सेरेमनी

सूबेदार इकबाल सिंह भारतीय सेना के परिवार की इस खास मेहमान बीबी रसूलन तथा वीर शहीद के पौत्र जमील खान को पैंथर स्टेडियम के गेस्ट हाउस में ले गए। इसके बाद बीबी ने अटारी बार्डर पर जाकर रीट्रीट सेरेमनी देखने की इच्छा व्यक्त की तो सैन्य अधिकारी शहीद की पत्नी को कुछ देर आराम करवाने के बाद आईसीपी अटारी ले गए, जहां उन्होंने बीएसएफ के जवानों की परेड देखी और दूर से ही उन्हें आशीर्वाद भी दिया।  

आज भी नहीं भूला 9 सितंबर 1965 का दिन

भारत-पाक सीमा से सटे गांव आंसल निवासी सरदूल सिंह को 9 सितंबर 1965 का दिन आज भी याद है। उन्होंने बताया कि उस दिन सायं भारतीय सेना पहुंची और गांववासियों को घरों से बाहर निकलने को मना कर दिया। कसूर (पाक) की तरफ से पाकिस्तान ने पैटर्न टैंकों के साथ हमला किया। हमारे जवानों के पास टैंकों के जवाब के लिए गोले नहीं थे लेकिन वीर अब्दुल हमीद ने एयरगन की मदद से ही पाक के टैंकों पर टूट पड़े और सात टैंकों को तबाह कर दिया। इसी बीच आठवें टैंक पर भी फायर किया जिससे टैंक का चेन टूट गया मगर इस टैंक पर सवार पाक सैनिक ने भारत माता के सपूत वीर अब्दुल हमीद को शहीद कर दिया।

अब्दुल हमीद की पत्नी बोलीं, पाकिस्तान आतंकवादियों का देश

शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी बीबी रसूलन ने कहा कि जब-जब पाक सैनिकों द्वारा सीमा पर भारतीय फौजियों के सिर काटे जाने की खबरें सुनती हूं तो मन विचलित हो जाता है। तब सीमा पर पहुंच कर शहीदों को नमन करने की इच्छा होती है। वह अमृतसर रेलवे स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। खेमकरण के गांव आंसल उताड़ में अपने पति की मजार पर चादर चढ़ाने से पूर्व उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि वे अपने शहीद पति शहीद वीर अब्दुल हमीद की मजार पर खेमकरण सेक्टर में लगने वाले वार्षिक मेले में पहुंच कर फूल चढ़ाएं। देश के अन्य शहीदों को भी नमन करें इसलिए आज वे यहां पहुंची हैं।

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