Gave fetus in envelope for testing after abortion 16219938

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गर्भपात हो गया तो जांच के लिए भ्रूण लिफाफे में डाल कर दे दिया

एक महिला के चार माह के भ्रण की गर्भ में ही मौत हाे गई। इसके बाद डाक्‍टरों ने भ्रूण को निकाल दिया। जांच की बात कहने पर भ्रूण को एक लिफाफे में डालकर पकड़ा दिया।

अमृतसर, [नितिन धीमान]। यहां के गुरु नानकदेव अस्‍पताल के कर्मियों की कार्यप्रणाली कई गंभीर सवाल तो उठाती ही हैमहिला की कोख में चार माह का बच्चा मौत की आगोश में समा गया। सरकारी डॉक्टर ने आपातकालीन डिलीवरी करके मृत बच्चे का भ्रूण बाहर निकाला और परिजनों से कहा कि इसे किसी नदी में प्रवाहित कर दो। दूसरी तरफ परिजनों यह जानना चाहते थे कि आखिर बच्चे की मौत की वजह क्या रही। डॉक्टर ने एक प्लास्टिक के लिफाफे में भ्रूण डाल दिया और परिजनों से कहा कि इसका टेस्ट करवा लो। लिफाफे में बच्चे का भ्रूण लेकर परिजन भटकते रहे। जब निजी लेबोरेट्री में पहुंचे तो यहां बताया गया कि बच्चे को कंटेनर में लाना चाहिए था।

चौथे महीने में महिला की,कोख में मौत के मुंह में समा गया बच्चा

मानवीय संवेदना से जुड़ी यह घटना गुरुनानक देव अस्पताल की व्‍यवस्‍था पर गंभीर सवाल उठाती है। शहर के मजीठा रोड क्षेत्र के प्रेमनगर निवासी दविंदर कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी सुनीता चार माह की गर्भवती थी। कुछ दिन पूर्व उसके पेट में असहनीय दर्द उठा। उन्होंने एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से उसका अल्ट्रासाउंड करवाया। रिपोर्ट में सामने आया कि भ्रूण का लिवर अपनी जगह कुछ दूरी पर है। रीढ़ की हड्डी भी मुड़ी हुई थी।

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दविंदर ने बताया कि इसके बाद वह अपनी पत्नी को शुक्रवार को गुरुनानक देव अस्पताल ले आए। यहां स्थित बेबे नानकी मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर की चौथी मंजिल पर उन्हें जाने को कहा गया। डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखकर सुनीता की जांच की और कहा कि बच्चा पेट के अंदर ही मर चुका है। इसे बाहर निकालना होगा।

दविंदर के अनुसार, यह तीसरी बार था जब सुनीता का बच्चा गर्भ में ही समाप्त हो गया था। इससे पूर्व उसके दो बच्चे भी कोख में मौत की नींद सो चुके थे। खैर, डॉक्टर ने सर्जरी करके बच्चे का भ्रूण बाहर निकाल दिया। इसके बाद डॉक्टर ने कहा कि वह इस भ्रूण को किसी नदी में प्रवाहित कर दे।

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दविंदर ने बताया कि वह जानना चाहता था कि आखिर सुनीता के गर्भ में ही बच्चे दफन क्यों हो जाते हैं। उसने डॉक्टर से इस विषय में बात की। डॉक्टर ने बताया कि मौत की सही-सही जानकारी भ्रूण का कैरियोटाइप टेस्ट करवाकर ही मिल सकती है। इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं बच्चे के मां-बाप के गुणसूत्रों में संक्रमण तो नहीं।

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डॉक्टर ने भ्रूण को ग्लवज पैक करने वाले पॉलीथिन में रखा और एक निजी लैब में जांच के लिए जाने को कहा। वह बदहवास से लैब में पहुंचा। यहां उससे पूछा गया कि बच्चे को पॉलीथिन में क्यों लाया गया, इसे कंटेनर में क्यों नहीं लाए। यह नियमों के विपरीत है और इससे टेस्ट रिपोर्ट भी प्रभावित हो सकती है।

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”मुझे मामले की शिकायत नहीं मिली है। परिजन लिखकर दें। गायनी डॉक्टर से बात करके जवाबतलबी की जाएगी। आरोप साबित हुए तो कार्रवाई की जाएगी।

                                           – डॉ. रामस्वरूप शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, गुरुनानक देव अस्पताल, अमृतसर।
 


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