निगम में फर्जी नौकरियां दे लाखों रुपये ठगकर अमृतसर का नटवर लाल फरार

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विपिन कुमार राणा, अमृतसर : नगर निगम पर लग रहे लांछन कम होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग के जाली सर्टिफिकेटों का मामला अभी निपटा नहीं है कि 46 लोगों ने वैरीफिकेशन की नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे एंठने के आरोप लगाए हैं। झांसे का शिकार हुए पीड़ितों ने आज ज्वाइंट कमिश्नर अलका को मिलकर उन्हें हलफिया बयान दिए और दोषी पर उन्हें ठगने की कार्रवाई करने की मांग की है।

पीड़ितों ने ज्वाइंट कमिश्नर को बताया कि तरनतारन के सुख¨वदर ¨सह राजू ने पचास हजार रुपए से लेकर तीन लाख रुपए लेकर उन्हें सिविल विभाग में वैरीफिकेशन की पोस्ट पर रखा है, जो पद ही निगम में नहीं है। वे पिछले एक साल से ड्यूटी कर रहे हैं और छह महीनों तक दस हजार रुपये वेतन भी दिया गया। लेकिन पिछले कई महीनों से ना वेतन मिल रहा हैं और ना ही राजू से कोई संपर्क हो पा रहा हैं। उन्होंने ज्वाइंट कमिश्नर को बताया कि बाकायदा उनका हाजिरी रजिस्टर लगा हुआ था और उनकी हाजिरी तक लगती रही है। रजिस्टर की खींची हुई फोटोज भी उन्होंने उन्हें दी।

बिक्रमजीत ¨सह, सुरजीत ¨सह, जुगराज ¨सह, रछपाल ¨सह, गुरपाल ¨सह, हरप्रीत ¨सह, लवप्रीत ¨सह, ने बताया कि वे अटारी, झब्बाल, राजाताल, अन्नगढ़, मक्खन¨वड, दुबुर्जी सहित अन्य गांवों के रहने वाले है। कुल 46 लोगों से राजू ने पैसे लेकर निगम में नौकरी पर रखा था। उन्होंने कहा गया कि वे पार्कों की वैरीफिकेशन करने की पोस्ट पर काम करेंगे। वे मालियों और सफाई सेवकों पर निगरानी का काम करते रहे हैं। राजू ने अपने जीजा के जरिए सभी लोगों को नौकरी पर रखा था। वे एक साल पर कंपनी बाग, बेअंत पार्क, आनंद पार्क, सक्तरी बाग, 40 खूह और बुलारिया पार्क में काम करते रहे हैं। पार्को में राउंड पर आने वाले निगम के अफसरों से मिलने नहीं दिया जाता था।

जाली सर्टिफिकेट वाला बंटी अभी भी पहुंच से बाहर

उधर, इससे पहले जाली सर्टिफिकेट को लेकर निगम ने पुलिस में कचहरी परिसर में काम करने वाले बंटी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता द्वारा बंटी के कचहरी में बताए गए चैंबर के अलावा उनके नंबर तक पुलिस को मुहैया करवाए गए थे। पर विडंबना ही कहेंगे कि अभी तक बंटी का पता ही नहीं लगा पाई है। दूसरी तरफ डेथ बर्थ विभाग में अनियमितताओं को दौर जारी है और उसके बाद भी एक ओर जाली प्रमाण पत्र मिलने का मामला सामने आ चुका है।

वैरीफिकेशन की कोई पोस्ट ही नहीं जिस पर पोस्ट पर इन लोगों को नौकरी पर रखा था, वैसे कोई पोस्ट निगम में नहीं हैं। नगर निगम के किसी मुलाजिम का इससे लेना देना नहीं है। सारा मामला निगम के बाहर हुआ हैं। लेकिन ये बहुत गंभीर मामला है। इस बाबत किसी भी अधिकारी को कोई जानकारी नहीं है। अब मामला ध्यान में आया है, इसे लेकर पुलिस कमिश्नर को दोषी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करके कार्रवाई करने के लिए लिखा जाएगा।

—अलका, ज्वाइंट कमिश्नर निगम।

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